ब्रजेश उदैनियाँ की रिपोर्ट
जालौन। गरीब, असहाय और बेघर परिवारों को छत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाई गई आसरा कॉलोनी एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। स्थानीय नागरिकों ने आवास आवंटन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जिन लोगों के पास पहले से मकान और पर्याप्त संसाधन हैं, उन्होंने कथित रूप से नियमों को दरकिनार कर आवास अपने नाम करा लिए, जबकि वास्तविक जरूरतमंद आज भी पक्की छत के लिए भटकने को मजबूर हैं।
क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि कुछ आवासों पर कब्जा जमाने के बाद उन्हें किराये पर भी दिया जा रहा है, जिससे योजना के मूल उद्देश्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरी ओर पात्र गरीब परिवार लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक योजना का लाभ नहीं मिल सका है।
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर अपात्र लोगों के आवंटन निरस्त करने तथा वास्तविक जरूरतमंदों को आवास उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि गंभीरता से जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
इस संबंध में डूडा विभाग के अधिकारी अनुज कुमार ने बताया कि दो अप्रैल 2025 को नगर पालिका परिषद जालौन को पत्र भेजकर आवासों की निष्पक्ष जांच कर सर्वे रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक नगर पालिका द्वारा न तो सर्वे कराया गया है और न ही पात्र-अपात्र लाभार्थियों की सूची डूडा विभाग को भेजी गई है। उन्होंने कहा कि जैसे ही रिपोर्ट प्राप्त होगी, नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किस वजह से नगर पालिका परिषद जालौन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जांच और सर्वे की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकी। इसको लेकर नगरवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
