जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का विशाल सत्संग संपन्न हुआ

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लदूना/नाहरगढ(तुलसीराम राठौर)– सत्संग का आयोजन गांव लदुना जिला मंदसौर में 24 मई रविवार को संत रामपाल जी महाराज का सत्संग एल ई डी कैसेट के माध्यम से संपन्न हुआ जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। सत्संग में संत रामपाल जी महाराज ने मानव समाज को तत्वज्ञान का उपदेश दिया जीवन में गुरु का क्या महत्व है यह समझाया।
गुरु के बिना भक्ति सफल नहीं होती।
वेद पुराण श्री मद्भागवत गीता आदि ग्रंथों से प्रमाणित आध्यात्मिक ज्ञान समझाया।
संत रामपाल जी महाराज जी ने कबीर साहेब जी की अमृत वनियो की वर्षा भी की
सत्संग में बताया की कबीर साहेब जी ने कहा है कि
सतगुरु के उपदेश का,लाया एक विचार।
जै सतगुरु मिलते नहीं,वो जाता नरक द्वार।।
नरक द्वार में दूत सब ,करते खेचा तान।
उनसे कबहू ना छूटता,वो फिरता चारो खानी।।
चारी खानी में भ्रमता,कबहु ना लगता पार।
सो फेरा सब मिट गया,मेरे सतगुरु के उपकार।।
कबीर सात समुंद्र की मसि करू,लेखनी करू बानिराय।
धरती का कागज करू,गुरु गुण लिखा ना जाए।।
कबीर – ये तन विष की बेलड़ी,गुरु अमृत की खान।
शीश दिए जो गुरु मिले,तो भी सस्ता जान।।
सात द्वीप नो खंड में ,गुरु से बड़ा ना कोय।
करता करे ना कर सके,गुरु करे सो होय।।
राम कृष्ण से कौन बड़ा, तिन्हुं भी गुरु किन्ह।
तीन लोक के वे धनी,गुरु आगे आधीन।।
हरि सेवा युग चार है,गुरु सेवा पल एक।
तासु पटतर ना तुले, संतन किया विवेक।।
संत रामपाल जी महाराज जी के अमृत वचनों को सुनकर श्रद्धालु बहुत प्रभावित हुए और श्रद्धालुओं ने जीवन में संत जी के बताए मार्ग पर चलने और जीवन को सादगी पूर्ण तरीके से जीने का संकल्प लिया। यह जानकारी भक्त मुकेश बसेर नाहरगढ ने दी ।
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