अनिल सक्सेना की रिपोर्ट
*बांदा:*i उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश के हर वर्ग के उत्थान के लिए लगातार काम कर रही है। इसी क्रम में बांदा जिले के दिव्यांगजन और श्रवण बाधित बच्चों के लिए सरकार की तरफ से एक बड़ी खुशखबरी है। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित शल्य चिकित्सा अनुदान योजना के अंतर्गत अब गरीब परिवारों के बच्चों को सुनने और बोलने की शक्ति वापस मिल सकेगी। सरकार कॉक्लियर इम्प्लांट के लिए 6 लाख रुपये तक की भारी-भरकम सहायता राशि प्रदान कर रही है।
*ग्रामीण क्षेत्र में 56080 व शहरी क्षेत्र में 56460 होनी चाहिए अभिभावकों की आर्थिक आय*
योजना का लाभ लेने के लिए अभिभावकों की वार्षिक आय गरीबी रेखा की सीमा (ग्रामीण क्षेत्र में 46080 रूपए और शहरी क्षेत्र में 56460 रुपए) के दोगुने से अधिक नहीं होनी चाहिए। जिले के पात्र लाभार्थी अपने दस्तावेज जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी के कार्यालय में जमा कर सकते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि योजना का लाभ लेने के लिए पात्रता की जांच कराना अनिवार्य है। इच्छुक अभिभावक अपने बच्चों के दस्तावेजों के साथ 30 अप्रैल 2026 तक आवेदन सुनिश्चित करें। सरकार की इस पहल से जनपद के सैकड़ों दिव्यांगजन मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे और एक सामान्य जीवन व्यतीत कर पाएंगे।
जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी राज बहादुर सिंह ने बताया कि 1 से 5 वर्ष तक के श्रवण बाधित बच्चों के लिए कॉक्लियर इम्प्लांट एक वरदान साबित होगा। अक्सर आर्थिक तंगी के कारण गरीब माता-पिता अपने बच्चों का इतना महंगा इलाज नहीं करा पाते थे। लेकिन योगी सरकार ने इस बाधा को दूर कर दिया है। इसके अलावा अन्य दिव्यांगजनों की करेक्टिव सर्जरी (सुधारात्मक शल्य चिकित्सा) के लिए भी 10000 रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है।
