नवीनीकरण न कराने वाले शीतगृहों को जारी हों नोटिस, नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए – जिलाधिकारी*

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विजय द्विवेदी वरिष्ठ पत्रकार

    सनत कुमार बुधौलिया 

जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक के दौरान नवीनीकरण की निर्धारित समयावधि के भीतर नवीनीकरण न कराने वाले शीतगृहों के विरुद्ध नोटिस निर्गत करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नवीनीकरण पूर्ण होने तक किसी भी शीतगृह में किसी प्रकार का अंतरण (ट्रांजेक्शन) नहीं किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने शासनादेश में वर्णित प्रावधानों का उल्लेख करते हुए निर्देश दिए कि संबंधित शीतगृह स्वामी तीन दिवस के भीतर समस्त आवश्यक अभिलेख कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि आवेदन पत्र नियमावली में निर्धारित प्रपत्र पर स्पष्ट एवं पूर्ण रूप से भरा हुआ होना चाहिए, तथा उसमें उल्लिखित समस्त सूचनाएं सही रूप से अंकित हों। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि आवेदन के साथ लाइसेंस शुल्क/नवीनीकरण शुल्क की कोषागार में जमा की गई मूल रसीद, भवन सुदृढ़ता प्रमाण-पत्र (पंजीकृत डिग्रीधारक सिविल अभियंता द्वारा), मशीनरी की सुदृढ़ता, कार्यशीलता एवं अवशीतन क्षमता से संबंधित प्रमाण-पत्र (पंजीकृत डिग्रीधारक मैकेनिकल/रेफ्रिजरेशन अभियंता द्वारा), गत वर्ष कराई गई बीमा पॉलिसी कवर नोट की सत्यापित प्रति, विद्युत लोड स्वीकृति एवं वैकल्पिक व्यवस्था (जनरेटर) की उपलब्धता का प्रमाण-पत्र अनिवार्य रूप से संलग्न किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि यदि गत वर्ष भंडारित आदि में किसी प्रकार की क्षति हुई हो तो उसकी विस्तृत सूचना प्रस्तुत की जाए। यदि शीतगृह पार्टनरशिप में संचालित हो तो पावर ऑफ अटॉर्नी द्वारा हस्ताक्षरित आवेदन पत्र, तथा यदि लिमिटेड कंपनी के अंतर्गत हो तो सक्षम मैनेजिंग डायरेक्टर द्वारा हस्ताक्षरित आवेदन पत्र एवं यह अंडरटेकिंग प्रस्तुत की जाए कि आवेदन की तिथि तक प्रबंधन व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।
इसके अतिरिक्त शीतगृह भवन, मशीनरी, लकड़ी की रैक्स, बॉक्स आदि के सुदृढ़ीकरण/मरम्मत का प्रमाण-पत्र, अंतिम विद्युत बिल के भुगतान की रसीद तथा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी प्रमाण-पत्र की सत्यापित प्रति भी प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि भंडारण के समय शीतगृहों द्वारा पावती रसीद जारी की जाए, जिसमें भंडारण प्रभार एवं भंडारण अवधि (15 फरवरी से 30 नवम्बर) तक का स्पष्ट उल्लेख हो, साथ ही यह जानकारी शीतगृह के सूचना पट्ट पर भी प्रदर्शित की जाए।
शासनादेश में वर्णित उपरोक्त बिंदुओं के परिप्रेक्ष्य में जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को लंबित नवीनीकरण प्रकरणों में शीतगृह स्वामियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी केके सिंह, डीएचओ परवेज खान आदि सहित सम्बंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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