सुनील सक्सेना की रिपोर्ट
बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग द्वारा विश्व मृदा दिवस जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ज्ञात हो कि संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा साल 2014 में 5 दिसम्बर को विश्व मृदा दिवस के रूप में मनाये जाने की घोषणा की गयी थी। विश्व मृदा दिवस का उद्देश्य किसानों, छात्रों तथा आम जनमानस में मृदा संरक्षण एवं मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता बढ़ाना है। इस वर्ष का कार्यक्रम ‘स्वस्थ्य मिट्टी, स्वस्थ शहर’ थीम पर केन्द्रित था।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा0 एस. के. सिंह ने कहा कि विभिन्न उद्योगों से निकलने वाला रसायनिक अपश्ष्टि और पैकिंग करने की सामग्री मृदा स्वास्थ्य को सर्वाधिक नुकसान पहुँचा रहे हैं। साथ ही उन्होने कहा कि फसलों में भी रसायनिक उर्वरकों व अन्य रसायनों का उपयोग में भी संतुलन होना चाहिये। उन्हांेने मृदा स्वास्थ्य संकट को रेखांकित करते हुए कहा यदि मृदा का स्वास्थ्य में इसी तरह गिरावट होती रही तो आने वाले समय में स्वस्थ खाद्य सामग्री का वैश्विक संकट पैदा हो सकता है।
डा0 जी. एस. पंवार, अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय ने बताया कि मृदा जीवन का मूल आधार है। इसलिए मृदा की उर्वरता और जैव विविधता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों से मृदा संरक्षण प्रणालियों को अपनाने का आग्रह किया।
डा० नरेन्द्र सिंह, निदेशक प्रसासन एवं अनुश्रवण ने कहा कि मानव विकास एवं सभ्यताओं के विकास में मृदा स्वास्थ्य की भूमिका अतुलनीय है। वनों से मिट्टी ढ़के रहने पर अपरदन कम होता है तथा मिट्टी की उर्वरता संरक्षित रहती है। विश्व मृदा दिवस के अवसर पर मृदा विभाग के विभागाध्यक्ष डा० जगन्नाथ पाठक ने कहा कि जिस प्रकार हमें जन्म देने वाली माँ है वैसे हम सबका पालन-पोषण करने वाली धरती माँ है। स्वस्थ धरती माँ के बगैर मनुष्य के स्वास्थ्य की कल्पना नहीं की जा सकती है।
विश्व मृदा दिवस के अवसर पर छात्रों के बीच प्रश्नोत्तरी (फनप्र) एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में नेहा कुमारी ने प्रथम और आशिक इकबाल ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। जबकि आरुषी चन्देल व अनुराग राजपूत को संयुक्त रूप से तृतीय पुरस्कार दिया गया। निर्णायक मण्डल में डा० पुष्पा, डा० अनिकेत काल्हापुरे एवं डा० उमेश चन्द्रा रहे।
इस अवसर पर डा० देव कुमार कार्यक्रम के आयोजन सचिव रहे। डा० ऐ.के. चैबे के धन्यवाद ज्ञापन के साथ ही कार्यक्रम का समापन किया गया।
*विश्व मृदा दिवस के अवसर पर कृषि निदेशालय, लखनऊ द्वारा आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में विश्वविद्यालय स्तर से छात्र कृष्णानन्द यादव, देवेन्द्र सिंह, अर्पित यादव, आशुतोष व संगम तिवारी ने संवाद प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। प्रदेश की राजधानी में आयोजित इस प्रतियोगिता में मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग के शोध छात्र कृष्णानन्द यादव ने द्वितीय स्थान प्राप्त कर उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही द्वारा प्रमाण पत्र प्राप्त किया। प्रतियोगिता में विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों के छात्रों ने भाग लिया था।*
