सुशील कुमार मिश्रा की रिपोर्ट
बांदा। प्रदेश के मुख्यमंत्री, सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के सारे आदेश और निर्देश जनपद की बागै नदी में संचालित इटवां खदान में पूरी तरह से धराशाही हो जाते हैं। इस खदान के संचालत की मनमानी सारे आदेशों और निर्देशों को धता बताते हुए लगातार जारी है। हद तो तब हो गयी जब बगै नदी पर संचालित इटवां खदान के वैध पट्टे की आड़ में इस खदान की मशीनों के द्वारा मौजा चकरेही में सीमा क्षेत्र से बाहर अवैध खनन के कार्य को अजाम दिया। जिसकी वीडियों सोशल मीडिया मंे वायरल होने के बाद दिनभर चर्चा का विषय बनी रही।
बताते चलें कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जीरा टालरेंस की नीति के तहत प्रदेश में अवैध खनन और अवैध परिवहन के साथ-साथ ओवरलोडिंग पर लगाम लगाने के अफसरों को साफ तौर पर कड़े निर्देश दिए थे। जिसके बाद जनपद फतेहपुर में एसटीएफ की कार्यवाही और हमीरपुर में तक्कों पर कार्यवाही एक नजीर बन गयी ।लेकिन जनपद बांदा में बागै नदी में संचालित इटवां खदान में सारे नियम और कायदों को गुप्ता और यादव जी की जुगल जोड़ी ने अपने पैरों तले रौंद डाला। इटवां खदान के वैध पट्टे की आड़ में पूरी तरह से दिन ढलने के बाद अवैध खनन का काला खेल शुरू हो जाता है। जिसका वीडियों को सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियों में इटवां खदान के वैध पट्टे में मौजा चकरेही में अवैध तरीके से नदी की जलधारा में भारी-भरकम मशीनों से अवैध खनन धड़ल्ले से किया जा रहा है। अवैध खनन के बाद ओवरलोड वाहनों में बालू को भरकर रात के अंधेरे में रवाना कर दिया । खनन कारोबारी के इस काले कारनामे की वजह से सरकार को प्रतिदिन लाखों रूपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। वहीं जब इस संबंध में खनिज अधिकारी से बात करने की कोशिश की गयी तो उन्होंने काल को रिसीव नहीं किया। प्रदेश के मुख्यमंत्री के सभी अधकारियों को सख्त निर्देश हैं कि सीयूजी नंबर पर हर समय अधिकारी उपलब्ध रहेंगे। लेकिन खनिज अधिकारी पर मानो यह निर्देश लागू ही नहीं होते। क्येांकि उनसे जब भी किसी भी खदान के बारे में जानकारी लेने के लिए कलमकार या स्थानीय किसानों द्वारा काल किया जाता है तो उनका सीयूजी नंबर रिसीव हीं नहीं होता। बताते चलें कि जनपद फतेहपुर में मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद खनन माफियाओं से जुड़े अधिकारियों को पर जिस तरह कार्यवाही की गयी थी। उससे कई लोगों को नसीहत मिल गयी ।लेकिन इटवां खदान के खनन कारोबारी को इस कार्यवाही का कोई भय नहीं है। तभी तो सीमा क्षेत्र से बाहर जाकर अवैध खनन कार्य को जमकर अंजाम दे रहा है। खदान सूत्रों की माने को संचालक को ख्ुाले तौर खनिज अधिकारी सहित जिम्मेदार अधिकारियेां का संरक्षण प्राप्त है। अब देखना यह है कि इस खदान पर कब एसटीएफ कार्यवाही करती है।
