इसके उपरांत तप कल्याणक की आंतरिक क्रियाएँ विधि-विधानपूर्वक सम्पन्न हुईं

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* सुशील कुमार मिश्रा की रिपोर्ट

बांदा।          सकल दिगम्बर जैन समाज बांदा (उत्तर प्रदेश) के तत्वावधान में आयोजित 1008 श्री मज्जिनेन्द्र ऋषभदेव जिनबिंब पंचकल्याणक एवं प्राण प्रतिष्ठा, वेदी प्रतिष्ठा विश्व शांति महायज्ञ के अंतर्गत आज तप कल्याणक दिवस बड़े श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया।
यह पंचदिवसीय महोत्सव 11 नवम्बर से आरंभ होकर 15 नवम्बर तक चलेगा।

महोत्सव में श्रद्धालुओं को आचार्य श्री शांतिसागर जी एवं आचार्य श्री नेमिसागर मुनिराज के मंगल आशीर्वाद प्राप्त हो रहे हैं।
कार्यक्रम का सान्निध्य बुंदेलखंड के प्रथमाचार्य श्री 108 दयासागर मुनिराज, मुनि श्री दीक्षासागर तथा आर्यिका श्री दिव्यामति माताजी सहित पवित्र संत-संघ द्वारा किया जा रहा है।

प्रतिष्ठाचार्यत्व का दायित्व डॉ. अभिषेक जैन शिक्षा चार्य निभा रहे हैं, जिनके साथ पंडित आशीष जैन कोडहार विशेष भूमिका में हैं।

धार्मिक अनुष्ठानों से दिनभर गूंजा परिसर
प्रातःमहावीर चौक( झंडा चौराहा) छोटी बाजार स्थित पंडाल में 6:30 बजे मंगला ष्टक, दिग्वन्दन, जिनाभिषेक, शान्तिधारा एवं नित्य महापूजन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
इसके उपरांत हवन शांति और जन्म कल्याणक पूजन विधिवत संपन्न हुआ।

दोपहर 12 बजे से नाभिराय दरबार का आयोजन हुआ, जिसमें ऋषभ कुमार का विवाह अत्यंत भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर आदिनाथ भगवान की बारात धूमधाम से निकली।
भगवान आदिनाथ के समय ही भोग भूमि का समापन होने से लोगो को भोजन् कपडे ओर भौतिक चीजों कि दिक्कत होने लगी जिसको भगबान ऋषभ नाथ अर्थात आदिनाथ ने कर्म सिद्दांत समझाया ओर इस् तरह् कर्म भूमि कि शुरुआत हुई ,आदिनाथ कि लड़की ब्राह्मणी और सुंदरी ने अंक लिपि व संसार को बतायी,

भगवान आदिनाथ ने ही कृषि,मसी, असी अर्थात खेती,व्यापार,शस्त्र आदि की जानकारी लोगो को दी ओर जीवन जीने कि राह दिखाई।
देश–देशान्तरों से आए राजाओं की उपस्थिति में मंचित निलांजना नर्तकी के नृत्य का नृत्य हुआ ओर नर्तकी के नाचते नाचते गिरकर प्रणान्त हो जाता है जिसे देखकर राजा आदिनाथ को वैराग्य हो जाता है वह राज्य पाट छोड़कर बन कि ओर तप करने चले जाते है और वैराग्य दर्शन की झांकी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
निलांजना के नृत्य करते-करते देहांत हो जाने और भगवान आदिनाथ के वैराग्य ग्रहण करने का नाट्य मंचन अत्यंत मार्मिक रहा।

इसके उपरांत तप कल्याणक की आंतरिक क्रियाएँ विधि-विधानपूर्वक सम्पन्न हुईं

कल शुक्रवार, 14 नवम्बर को ज्ञान कल्याणक दिवस मनाया जाएगा, जिसमें केवलज्ञान, समवसरण निर्माण और दिव्य ध्वनि प्रवर्तन के पवित्र आयोजन होंगे।
महोत्सव का समापन 15 नवम्बर, शनिवार को मोक्ष कल्याणक के साथ होगा।
उस दिन अग्निकुमार देवों द्वारा संस्कार, मोक्ष पूजन, हवन शांति एवं भव्य नगर शोभायात्रा निकाली जाएगी।

 

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