भारतीय शास्त्रीय संगीतसितार वादन की हुई सुरम्य प्रस्तुति

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सुनील सक्सेना की रिपोर्ट

SPIC MACAY उत्तर प्रदेश चैप्टर, बांदा द्वारा आयोजित “सितार वादन समारोह” ने बांदा के विद्यार्थियों को किया मंत्रमुग्ध
बांदा, 3 नवम्बर 2025 — भारतीय शास्त्रीय संगीत की मधुर लहरियों से आज भागवत प्रसाद मेमोरियल एकेडमी का प्रांगण गुंजायमान हो उठा, जब SPIC MACAY (Society for the Promotion of Indian Classical Music and Culture Amongst Youth) उत्तर प्रदेश चैप्टर, बांदा द्वारा आयोजित सितार वादन समारोह में प्रख्यात सितार वादक श्री गौरव मजुमदार ने अपनी अद्भुत प्रस्तुति से विद्यार्थियों को संगीत साधना का गहरा अनुभव कराया। उनके साथ तबला पर संगत कर रहे थे प्रसिद्ध तबला वादक श्री विनोद मिश्रा।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कलाकारों का स्वागत विद्यालय के प्रांगण में स्थित स्कूल के मूल संस्थापक एवं संस्थापिका की प्रतिमा स्थल पर पुष्पहार अर्पित कर किया गया। तत्पश्चात वे Euro Kids Hall पहुँचे जहाँ संगीत रसिक विद्यार्थियों की उपस्थिति ने वातावरण को और अधिक ऊर्जावान बना दिया। कविता मैम द्वारा कलाकारों की जीवन यात्रा और उपलब्धियों का परिचय दिया गया।
संगीत का महत्व
संगीत भारतीय संस्कृति की आत्मा है — यह मनुष्य को अनुशासन, एकाग्रता और भावनात्मक गहराई प्रदान करता है। शास्त्रीय संगीत केवल कला नहीं, बल्कि साधना है जो विचारों को पवित्र और मन को शांत करती है। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में सौंदर्यबोध, संवेदनशीलता और सांस्कृतिक चेतना का विकास करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान सितार वादक श्री गौरव मजुमदार ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि “संगीत आत्मा की भाषा है, जिसे महसूस किया जाता है, समझाया नहीं जाता।” उनकी राग प्रस्तुतियों ने पूरे सभागार को एक आध्यात्मिक शांति से भर दिया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री शिवेन्द्र कुमार ने बताया कि “यह संगीत उपासना विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रही। विद्यार्थियों ने पूरे अनुशासन के साथ कार्यक्रम का आनंद लिया और यह आयोजन उनके लिए एक यादगार अनुभव बन गया।”
अध्यक्ष श्री शिव शरण कुशवाहा
(भागवत प्रसाद मेमोरियल ट्रस्ट एवं एकेडमी के अध्यक्ष)
उन्होंने कहा कि “भारतीय शास्त्रीय संगीत हमारी परंपरा की गहराई का प्रतीक है। विद्यार्थियों को ऐसे आयोजनों से न केवल संगीत का ज्ञान मिलता है बल्कि जीवन में संतुलन और संवेदना का भाव भी विकसित होता है।”
कार्यक्रम की सफलता में निदेशिका श्रीमती संध्या कुशवाहा, शैक्षणिक निदेशिका डॉ. वृंदा जिनारल, तथा संयोजक अनुपमा त्रिपाठी का विशेष योगदान रहा। विद्यालय परिवार ने संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार एवं भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय, लखनऊ के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह अद्भुत आयोजन संभव हो सका।
अंत में, कार्यक्रम संयोजक कविता मैम ने सभी अतिथियों, कलाकारों और विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया तथा कहा कि “संगीत आत्मा की शुद्धि का माध्यम है — इसकी अनुभूति ही सच्ची शिक्षा है।”

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