*मिलावटखोरों पर सख्ती, जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई – जिलाधिकारी*

                  अभिवादन एक्सप्रेस

सनत कुमार बुधौलिया

उरई।।जनसामान्य को सुरक्षित एवं मानक के अनुरूप खाद्य पदार्थों तथा गुणवत्तापरक औषधियां उपलब्ध कराने और खाद्य पदार्थों में मिलावट व नकली दवाओं की बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी समीर ने कलेक्ट्रेट सभागार में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति अथवा प्रतिष्ठान को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि व्यवसाय के नाम पर जनसामान्य के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकानों, दूध, पनीर, घी, खाद्य तेल एवं अन्य खाद्य पदार्थों की दुकानों पर नियमित निरीक्षण करें और संदेह होने पर नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजें। जिन प्रतिष्ठानों के नमूने जांच में फेल पाए जाते हैं, उनके विरुद्ध प्रभावी पैरवी करते हुए नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ऐसे प्रतिष्ठानों के संबंध में नियमानुसार सार्वजनिक जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए, जिससे उपभोक्ता सतर्क रह सकें। जिलाधिकारी ने आमजन को मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचाने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान विशेष रूप से मिठाइयों की खरीदारी में सावधानी बरतने की आवश्यकता है। उपभोक्ता अत्यधिक चमकीली, असामान्य रंगों वाली मिठाइयों, खुले में रखी धूल-मिट्टी से दूषित मिठाइयों तथा संदिग्ध मावे से तैयार उत्पादों को खरीदने से बचें। बासी, बदबूदार या असामान्य स्वाद वाले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। मिलावटी मावा, संदिग्ध घी, नकली पनीर और घटिया खाद्य तेल से तैयार खाद्य सामग्री स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है। मिठाई खरीदते समय उसकी ताजगी, स्वच्छता, निर्माण एवं पैकिंग की तारीख तथा प्रतिष्ठान की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें। खुले एवं बिना लेबल वाले खाद्य तेल, मसाले और अन्य संदिग्ध खाद्य सामग्री खरीदने से भी बचें। उन्होंने निर्देश दिए कि खाद्य पदार्थों एवं औषधियों में मिलावट, अधोमानकता और नकली उत्पादों की रोकथाम के लिए जनसामान्य को उनके उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी दी जाए। इसके लिए कार्यशालाओं, संगोष्ठियों, नुक्कड़ नाटकों तथा अन्य प्रचार माध्यमों का प्रभावी उपयोग किया जाए, ताकि आम नागरिक स्वयं भी मिलावट के प्रति जागरूक हों और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना संबंधित विभाग को दे सकें।जिलाधिकारी ने खाद्य अपमिश्रण तथा नकली, अधोमानक, अपमिश्रित एवं मिथ्याछाप औषधियों की रोकथाम के लिए मजबूत मुखबिर तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और एकरूपता सुनिश्चित की जाए। इस अभियान में जनपद में कार्यरत स्वैच्छिक संगठनों, व्यापारिक संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों का भी सहयोग लिया जाए।उन्होंने औषधि विभाग को निर्देशित किया कि मेडिकल स्टोरों एवं औषधि प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण किया जाए। नकली, एक्सपायरी अथवा मानकों के विपरीत बेची जा रही दवाओं पर प्रभावी कार्रवाई की जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि जनसामान्य को गुणवत्तापरक एवं सुरक्षित औषधियां उपलब्ध हों। जिलाधिकारी ने कहा कि खाद्य पदार्थ सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े हैं, इसलिए इस कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी संबंधित अधिकारी नियमित निरीक्षण, नमूना संग्रहण, जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई तथा जनजागरूकता के कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करें, जिससे जनपदवासियों को सुरक्षित खाद्य सामग्री एवं गुणवत्तापरक दवाएं उपलब्ध हो सकें।
इस अवसर पर सहायक आयुक्त खाद्य, औषधि निरीक्षक रेखा सचान, डीजीसी क्रिमिनल रामलखन आदि सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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