राजकीय मेडिकल कॉलेज उरई में मेगा विधिक सहायता शिविर का भव्य आयोजन* 

                 अभिवादन एक्सप्रेस 

सनत कुमार बुधौलिया

उरई।    राजकीय मेडिकल कॉलेज उरई परिसर में मेगा विधिक सहायता शिविर का भव्य आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में न्याय एवं जनकल्याणकारी योजनाओं को एक ही मंच पर उपलब्ध कराया गया।

शिविर में 36 विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए, जहां 2518 लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं से मौके पर ही लाभान्वित किया गया। राजस्व, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, श्रम, बैंकिंग, महिला कल्याण सहित अनेक विभागों ने पंजीकरण, प्रमाणन एवं स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए सेवाएं प्रदान कीं।

नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सामाजिक चेतना का संदेश

कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। नाटक के माध्यम से घरेलू हिंसा, बाल श्रम, शिक्षा का अधिकार तथा किसानों की समस्याओं जैसे ज्वलंत सामाजिक मुद्दों को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया। एक मार्मिक प्रस्तुति में यह दिखाया गया कि किस प्रकार किसान मजबूरी में कर्ज लेता है और समय पर अदायगी न होने पर कुछ लोग उसके घर पहुंचकर उसे प्रताड़ित करते हैं। छात्रों ने संदेश दिया किसान का पसीना सोना है, उसका हक नहीं खोना है। नाटक के माध्यम से यह भी बताया गया कि कानून गरीब, असहाय, महिला, बच्चे और किसान सभी के अधिकारों की रक्षा करता है तथा उन्हें भयमुक्त जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है।

माननीय जनपद न्यायाधीश श्री विरजेन्द्र कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समानता और न्याय का अधिकार देता है। उन्होंने बताया कि निःशुल्क विधिक सहायता का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 39(क) के तहत सुनिश्चित किया गया है, जिसके अंतर्गत आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों को निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने घरेलू हिंसा, बाल श्रम, महिला उत्पीड़न एवं अवैध वसूली जैसे मामलों में प्रचलित कानूनों की जानकारी देते हुए कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण का दायित्व है कि कोई भी पात्र व्यक्ति केवल आर्थिक कमजोरी के कारण न्याय से वंचित न रहे। उन्होंने आमजन से अपील की कि किसी भी प्रकार की प्रताड़ना या अन्याय की स्थिति में विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क कर निःशुल्क सहायता प्राप्त करें।

जिलाधिकारी समीर कहा कि शासन की प्राथमिकता है कि गरीब, असहाय एवं निर्धन व्यक्तियों को किसी भी प्रकार की प्रताड़ना से संरक्षण मिले। यदि किसी व्यक्ति द्वारा अवैध वसूली, धमकी, उत्पीड़न या सामाजिक शोषण किया जाता है तो भारतीय दंड संहिता की सुसंगत धाराओं तथा अन्य विधिक प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाती है।

उन्होंने कहा कि पात्र व्यक्तियों को विभिन्न कानूनों के अंतर्गत निःशुल्क सहायता, विधिक परामर्श एवं योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी किसान, मजदूर, महिला या श्रमिक अन्याय का शिकार न हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से पहुंचाया जाए।

पुलिस अधीक्षक सुरेश कुमार रावत ने अपने संबोधन में कहा कि कानून व्यवस्था का मूल उद्देश्य आमजन को सुरक्षा, सम्मान और भयमुक्त वातावरण प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि घरेलू हिंसा, बाल श्रम, अवैध वसूली, धमकी या किसी भी प्रकार की प्रताड़ना को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में पुलिस त्वरित रूप से सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करती है। उन्होंने विशेष रूप से किसानों, महिलाओं, मजदूरों एवं कमजोर वर्गों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति कर्ज या अन्य किसी बहाने से दबाव बनाकर उत्पीड़न करता है तो यह दंडनीय अपराध है। आमजन निर्भीक होकर पुलिस से संपर्क करें प्रत्येक शिकायत पर संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ कार्रवाई की जाएगी। विधिक सेवा प्राधिकरण और पुलिस प्रशासन का उद्देश्य समान है पीड़ित को त्वरित सहायता और न्याय दिलाना। उन्होंने छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक की सराहना करते हुए कहा कि सामाजिक जागरूकता ही अपराध की रोकथाम का सबसे प्रभावी माध्यम।

अपर जिला जज प्रथम सतीश द्विवेदी ने कहा कि विधिक साक्षरता समाज को सशक्त बनाती है। उन्होंने कहा कि जब नागरिक अपने अधिकारों और कानूनों से परिचित होते हैं तो शोषण की संभावना स्वतः कम हो जाती है। उन्होंने इस शिविर को न्याय की ‘डिलीवरी’ सुनिश्चित करने की प्रभावी पहल बताया।

सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मनाली चंद्रा द्वारा यह बताया गया कि मेगा शिविर का मुख्य उद्देश्य शासन द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचाना तथा आमजन को निःशुल्क विधिक सहायता, उनके कानूनी अधिकारों एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका एवं कार्यपालिका के आपसी समन्वय एवं सहयोग से ही आमजन को त्वरित न्याय तथा जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से उपलब्ध कराया जा सकता है।

मेगा विधिक सहायता शिविर में बड़ी संख्या में जनपदवासियों की सहभागिता रही। न्याय, जागरूकता और जनकल्याण को एक मंच पर समाहित करने वाला यह आयोजन जनपद जालौन में सुशासन और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुआ।

इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय नंद प्रताप ओझा, स्पेशल जज एससीएसटी सुरेश कुमार गुप्ता, स्पेशल जज डकैती चन्द्र मोहन चतुर्वेदी व आदि अधिकारी मौजूद रहे।

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