अब लड़ाई भक्त बनाम गैर भक्त होगी

       अभिवादन एक्सप्रेस 

 

                       डॉ0 ओ0पी0 मिश्र

 

 

1 नवंबर की तारीख में अब मात्र 24 घंटे बचे हैं यह 24 घंटे इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विपक्ष और पक्ष दोनों शायद टकराने को तैयार है। मैंने तो तीन दिन पहले ही कह दिया था कि अब आने वाले दिनों में भक्त बनाम गैरभक्त की लड़ाई सड़कों पर दिखाई देगी ।

क्योंकि सत्ता प्रतिष्ठान शायद समझ चुका है कि अब विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के मुद्दे को सीधे-सीधे जनता के बीच ले जाकर एक बड़े जन आंदोलन के रूप में तैयार कर रही है।

क्योंकि विपक्ष यह बात अच्छे से समझ चुका है कि जब तक जनता और जन समर्थन साथ नहीं होगा तब तक सत्ता प्रतिष्ठान को डराया नहीं जा सकता। यही कारण है की प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने जनसुनवाई कार्यक्रम शुरू किया है जिसकी शुरुआत लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को दिल्ली के त्रिलोकीपूरी इलाके से शुरू की। दिल्ली का त्रिलोकीपूरी इलाका वह इलाका है जहां पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सबसे ज्यादा कत्लेआम हुआ था। इसी कत्लेआम यानी 1 नवंबर को भाजपा हाईलाइट कर रही है। और लोगों को बता रही है कि कांग्रेस ने पहली नवंबर की तारीख इसलिए चुनी है ताकि लोगों के जख्मों पर नमक छिड़का जा सके ।

वैसे ऐसा नहीं है कि कांग्रेस इस बात से वाकिफ नहीं है पूरी तरह से वाकिफ है और जान रही है कि सत्ता प्रतिष्ठान विपक्ष की योजना को फेल करना चाहते हैं ।

इसी बात को ध्यान में रखकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने घोषणा की है कि CEC के इस्तीफा तक आंदोलन जारी रहेगा। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जनसुनवाई कार्यक्रम में कहा कि हम काफी समय से वोट चोरी का मुद्दा उठा रहे हैं और बता रहे हैं कि वर्तमान मोदी सरकार भारत के मतदाताओं की बदौलत नहीं बल्कि ज्ञानेश कुमार के जरिए चुनाव जीती है । उन्होंने आगे कहा कि अब पूरा देश समझ रहा है कि वोट चोरी शीर्ष स्तर से की जा रही है इसलिए अब आम आदमी को भी आगे आना होगा वरना उसे वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया जाएगा। विपक्षी नेताओं के अनुसार 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान की रैली केवल विपक्ष की नहीं बल्कि आम आदमियों की रैली है। यही कारण है कि सत्ता प्रतिष्ठान अपने लोगों के जरिए इस रैली को रुकवाना चाहती है। यानि भक्तों के जरिए और गैर भक्तों को रास्ते से हटाना चाहती है। जबकि इंडिया गठबंधन के लोग और उसमें से खास तौर से राहुल गांधी अयोध्या मंदिर प्रकरण की तरह इस मुद्दे को जीवित रखना चाहते हैं। यानी कानून को जो करना है वह करें लेकिन जनमत का दबाव हम इतना बढ़ा दे की दबाव के आगे न केवल ज्ञानेश कुमार बल्कि सरकार भी हाय तौबा करने लगे।

भाजपा ने यह काम राम मंदिर प्रकरण में किया था और कहा था कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा मामला है। अब यही बात विपक्षी नेता जन दबाव के जरिए कहने की तैयारी कर रहे हैं। बस यही अंदेशा सत्ता प्रतिष्ठान को परेशान कर रहा है तभी तो भाजपा तथा संघ परिवार ने मिलकर निर्णय लिया है कि विपक्ष के सामने अब अपने भक्तों को भी सड़क पर उतारेगी। विपक्ष ने जहां अपनी रैली की तैयारी की तिथि रख 1 नवंबर रखी है वही सत्ता पक्ष ने अपनी तिथि 30 अक्टूबर घोषित कर दी है । सत्ता पक्ष इसके जरिए जनमानस को बतायेगा कि विपक्षी मोदी को कमजोर करना चाहते हैं देश में अराजकता पैदा करना चाहते हैं संविधान और कानून का मखौल उड़ाकर केंद्र सरकार को रिजीम चेंज करना चाहते हैं। इस तरह भविष्य में देश दो हिस्सों में बट जाएगा और हिंदू हिंदू एक रहेंगे की बात मिट्टी में मिल जाएगी । वैसे भी अब देश में हिंदुओं की संख्या ना के बराबर रह गई है अब तो जो भी हिंदू है वह जातियों में वर्गों में संप्रदाय में बटे हुए हैं शायद इसी समाज की कल्पना 1925 में विजय दशमी के दिन डॉक्टर केशव राव बाली राव हेडगेवार ने की थी। जिनके मानस पुत्र डॉ मोहन भागवत आज सर संघ चालक बनकर भाजपा की हां में हां मिला रहे हैं और बता रहे हैं कि विदेशी फंडिंग के जरिए देश को अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है।

नौजवानों को जेन जी को बरगलाया जा रहा है तथा मोदी सरकार को अस्थिर किया जा रहा है तभी तो आजकल सर संचालक का बौद्धिक राष्ट्र निर्माण, व्यक्ति निर्माण तथा शाखाओं पर नहीं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी और मोदी सरकार पर हो रहा है। और हो तो क्यों ना हो आज की तारीख में मोदी जी की ही बदौलत संघ है और उन्हीं की बदौलत संघ प्रमुख डॉक्टर मोहन भागवत।

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