योगी सरकार की नीतियों से युवा बन रहे आत्मनिर्भर, बांदा के छाबी तालाब के स्वरकृष्ण सोनकर की बदली किस्मत*

अनिल सक्सेना की रिपोर्ट

*बांदा: ।     सीएम योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना युवाओं के लिए स्वरोजगार का एक बहुत बड़ा साधन बनकर सामने आ रही है और इस योजना के जरिए बांदा जिले में हजारों युवा अपने पैरों पर खड़े हो गए हैं और रोजगार से जुड़ गए हैं। यही नहीं इन लोगों के द्वारा अपने साथ प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से भी कई लोगों को जोड़ा गया है और लोगों को अपने घरों में ही या घर के पास ही रोजगार का साधन मिल गया है। जिससे इन्हें अपना और अपने परिवार का पेट भरने के लिए जो पहले मुश्किलें होती थी उसे छुटकारा मिल गया है।

*पहले करते थे कंपटीशन की तैयारी जब नही मिली सफलता तो शुरू किया स्वरोजगार*

बांदा शहर के छाबी तालाब मोहल्ले के रहने वाले ईश्वर कृष्णा ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कंपटीशन की तैयारी की और कई वर्षों तक इन्होंने प्रतियोगी परीक्षाएं दी। लेकिन जब इन्हें सफलता नहीं मिली तब इन्होंने खुद ही स्वरोजगार करने की सोची, और फिर यह मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना का लाभ लेने के लिए बांदा जिला उद्योग कार्यालय पहुंचे और सभी प्रक्रिया को पूरा किया। जिसके बाद इन्हें इस योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपए का लोन मिला और फिर इन्होंने शहर के मवई गांव में आर्टिफिशियल फ्लावर यूनिट की स्थापना की और उसे चालू किया। जहां एक साल बीत जाने के बाद अब इनकी यूनिट चलने लगी है और इन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है। यही नहीं ईश्वर कृष्ण ने अपने इस काम में 9 महिलाओं समेत दर्जन भर लोगों को जोड़ रखा है, जो आर्टिफिशियल फूलों को बनाने का काम करते हैं और उन्हें भी घर बैठे कमाई का जरिया मिल गया है और सभी अपने पैरों पर खड़े हैं।

*अपने इस काम का आगे और भी करेंगे विस्तार*

ईश्वर कृष्ण ने बताया कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना का लाभ मुझे पिछले साल जुलाई 2025 में मिला था। और सितंबर के महीने से मैंने अपनी आर्टिफिशियल फ्लावर यूनिट की शुरुआत की थी। मैंने अपने आर्टिफिशियल फ्लावर यूनिट का नाम कृष्णा एमएसएमई रखा है। जहां छोटे और बड़े फूल व माला समेत कई तरह की चीजे हमारे यहां बनाई जाती हैं और पूरे जिले में इसकी सप्लाई होती है। इन्होंने बताया कि मेरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में लगभग दर्जन भर लोग जुड़े हुए हैं। जिसमें 9 महिलाएं भी हैं और रॉ मैटेरियल को मैं लाकर इन्हें देता हूं और वह सब फूलों को तैयार करते हैं। जिसके बाद इन्हें बाजारों में बेचा जाता है। ईश्वर कृष्ण ने बताया कि सभी महिलाएं अपने घरों में ही खाली समय में इन फूलों को तैयार करती हैं और प्रत्येक महिला लगभग तीन से चार हजार रुपये प्रतिमाह कमा लेती है और एक तरीके से उन्हें घर बैठे ही रोजगार मिल गया है। इन्होंने कहा कि आगे आने वाले समय में मैं अपने इस व्यवसाय का और विस्तार करूंगा। इन्होंने बताया कि सभी खर्चे काटकर मुझे भी लगभग प्रतिमा 15 से 20 हजार रुपये की बचत हो जाती है।

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