राघवेन्द्र शर्मा अभिवादन एक्सप्रेस उरई (जालौन)। चंबल नदी के विधिवत पूजन-अर्चन और आरती के साथ जल सहेलियों की अविरल-निर्मल यमुना यात्रा के तृतीय दिन का शुभारंभ हुआ। यात्रा का उद्देश्य यमुना को अविरल और निर्मल बनाए रखने के साथ समाज में नदियों के महत्व को पुनः स्थापित करना है।
इस अवसर पर जल सहेली संगठन के संस्थापक डॉ. संजय सिंह ने कहा कि चंबल वह पवित्र नदी है जो यमुना को नया जीवन देती है। उन्होंने बताया कि बड़ी नदियों में मिलने वाली नदियाँ स्वच्छ रहेंगी तो मुख्य नदी भी अविरल रहेगी। उन्होंने यात्रा के ठहराव हेतु निःशुल्क मैरिज गार्डन उपलब्ध कराने पर शशिशेखर त्रिपाठी का आभार व्यक्त किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष जल सहेली पुष्पा ने कहा, “यह केवल पदयात्रा नहीं, बल्कि नदी और समाज के बीच टूटा संवाद जोड़ने का प्रयास है। जब तक आमजन नदी को अपना समझकर उसकी रक्षा नहीं करेगा, यमुना को निर्मल बनाना संभव नहीं है।” उन्होंने महिलाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि जल सहेलियाँ घर-घर तक जल संरक्षण का संदेश पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जल सहेली लक्ष्मी ने बताया कि जल संगीत, संवाद और शपथ के माध्यम से बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक यह संदेश दिया जा रहा है कि पानी केवल संसाधन नहीं, जीवन है। उन्होंने नल बंद करने जैसे छोटे कदमों से बड़े बदलाव की प्रेरणा दी।
यात्रा के दौरान सिद्धि विनायक विद्यालय में छात्रों को यमुना में बढ़ते प्रदूषण और इसे कम करने के उपाय बताए गए। विद्यार्थियों से नदियों के संरक्षण की शपथ भी करवाई गई। सेहोआ गांव में स्थानीय निवासी जयवीर सिंह ने यमुना के बढ़ते प्रदूषण की पीड़ा साझा की। चकरनगर चौराहे पर जल सहेलियों का सम्मान किया गया। इसके बाद जय गुरुदेव उत्सव गार्डन में आयोजित यमुना सभा में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता मनीष राजपूत ने कहा कि जल सहेलियाँ बुंदेलखंड जैसे जल-संकटग्रस्त क्षेत्र में वर्षों से जो कार्य कर रही हैं, वही यमुना के लिए आशा की किरण हैं। उन्होंने कहा कि यह यात्रा जन-चेतना को आंदोलन में बदलने की क्षमता रखती है।
