जनपद के मुख्यालय उरई में ‘एक रुपये का पर्चा’ बना दस रुपये की वसूली का जरिया

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🏥 जिला अस्पताल व जिला महिला चिकित्सालय में मरीजों से खुलेआम गाड़ी शुल्क, CMS पर उठे गंभीर सवाल

राघवेन्द्र शर्मा उरई (जालौन)। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को गरीबों के लिए सुलभ बनाने के तमाम दावों के बीच उरई के जिला अस्पताल और जिला महिला चिकित्सालय से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां एक रुपये के पर्चे के नाम पर मरीजों और उनके तीमारदारों से 10-20 रुपये का तथाकथित “गाड़ी शुल्क” वसूले जाने का आरोप है।
सूत्रों और पीड़ितों के अनुसार, अस्पताल परिसर में प्रवेश करते ही वाहन खड़ा करने के नाम पर यह एक अवैध शुल्क की रसीद बनाकर, बिना किसी स्पष्ट आदेश के वसूला जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पर्चा मात्र एक रुपये में बनता है, तो मरीजों से यह अतिरिक्त वसूली किस नियम के तहत की जा रही है?
जब प्रकरण मे जिला पुरूष चिकित्सालय के सीएमएस डा०आनंद उपाध्याय से बात की तो उनका कहना इस शुल्क के लगने से रसीद मिलती और गाड़ी की सुरक्षा सुनिश्चित रहती है। बतादे कि सीएमएस द्वारा ही यह अबैध ठेका उठाया जाता है । सीएमएस आनंद उपाध्याय का सार यह कि पार्किंग शुल्क से गाड़ी सुरक्षित रहती जबकि जिला पुरूष एवं महिला चिकित्सालय की अलग अलग चौकियां है। और जिला चिकित्सालय सुरक्षा की दृष्टि डेढ़ दर्जन आर्मी गार्ड एवं महिला अस्पताल मे एक दर्जन महिला पुरूष गार्ड लगे है। इसके अलावा ट्रेफिक पुलिस भी तैनात रहती है।

दोनो ठेके गाजला सलीम सिद्धकी के पास

जिला महिला एवं पुरूष चिकित्सालय के दोनो ठैके चर्चित ठैकेदार गाजला सली सिद्धकी के पास है और इन पर लोगो के आरोप रहते कि यह भाजपा सरकार को लेकर सकारात्मक सोच नही रखते है। इसकी देख रेख सलीम सिद्धकी ही करते है।

दिलचस्प बात नपा करा रही महिला अस्पताल मे बसूली

जिला महिला अस्पताल के बाहर नगर पालिका परिषद उरई के द्वारा ठेंका उठाकर प्रसूत्ति महिलाओ के परिजनो से बसूली करायी जाती है।

गरीब मरीजों पर दोहरी मार
इलाज के लिए दूर-दराज़ से आने वाले गरीब मरीजों का कहना है कि
“इलाज मुफ्त बताया जाता है, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही पहले गाड़ी के नाम पर पैसे देने पड़ते हैं। पूछने पर कोई साफ जवाब नहीं देता।”
महिला चिकित्सालय में गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से भी यही शुल्क लिए जाने के आरोप हैं, जो व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर करता है।

      सीएम योगी एक जनसभा मे अवैध पार्किंग हटाने को लेकर कह चुके इसके बावजूद भी ठैकेदार और अधिकारियो की जुंगलबंदी से होता रहा अबैध ठेंका

 दोनो CMS की भूमिका पर सवाल

सबसे गंभीर प्रश्न मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) की भूमिका को लेकर उठ रहा है।

अस्पताल में कौन चला रहा है यह “गाड़ी शुल्क” की व्यवस्था?
और यदि हां, तो क्या यह सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन नहीं?

 

 

जवाबदेही तय करने की मांग

सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि
इस वसूली की तत्काल जांच कराई जाए
अवैध रूप से वसूली गई राशि का हिसाब सार्वजनिक किया जाए
और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो
 सवाल अभी बाकी हैं…
सरकार की मंशा चाहे जो हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह सवाल पूछ रही है—
क्या सरकारी अस्पताल गरीबों की सेवा के लिए हैं या उनसे वसूली का नया जरिया बनते जा रहे हैं?
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर मामले पर कब और क्या कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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