राघवेन्द्र शर्मा की रिपोर्ट
उरई (जालौन)। जनपद के थाना कुठौंद में थाना प्रभारी की कथित तानाशाही का मामला सामने आया है। आरोप है कि पत्रकार निखिल तिवारी अपनी आपसी कहासुनी की शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय पत्रकार को ही हिरासत में ले लिया।
बताया गया कि तहरीर देने के बाद पत्रकार को ठंड के मौसम में करीब 10 घंटे तक हवालात में बैठाकर रखा गया, जहां उन्हें मानसिक प्रताड़ना और अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ा। इस घटना से पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पत्रकारों का कहना है कि जब एक पत्रकार के साथ इस प्रकार का व्यवहार किया जा सकता है, तो आम नागरिकों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। इस तरह की घटनाएं पुलिस विभाग की छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं।
पीड़ित पत्रकार निखिल तिवारी ने बताया कि यदि उच्चाधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच नहीं करते हैं, तो वह मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाएंगे। घटना के बाद जनपद के पत्रकार संगठनों में आक्रोश व्याप्त है और दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।
