बांदा के टॉप टेन हिस्ट्रीशीटर अपराधियों पर चला कानून का डंडा – गैंगस्टर एक्ट में तीन को 6 साल की कैद और जुर्माना

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 निज संवाददाता

जनपद बांदा में न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अपराधियों के मन में कानून का भय पुनः स्थापित किया है। विशेष न्यायालय गैंगस्टर एक्ट ने जनपद के टॉप टेन हिस्ट्रीशीटर अपराधियों में शामिल तीन शातिर अपराधियों को 6 – 6 वर्ष के कठोर कारावास एवं ₹7000 -7000 अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में 06माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

यह मुकदमा थाना बदौसा के प्रभारी निरीक्षक अरविन्द सिंह गौर द्वारा दिनांक 21 जुलाई 2020 को दर्ज कराया गया था। प्राथमिकी में नामजद अभियुक्त छेदीलाल यादव उर्फ छेदिया पुत्र जगन्नाथ यादव, सोनू उर्फ आलोक, आनंद यादव उर्फ खुशीलाल, एवं रामनरेश उर्फ रतिभान,लाल जी निवासीगण ग्राम जमुनिहापुरवा थाना बदौसा जनपद बांदा के निवासी हैं। अभियोजन के अनुसार यह सभी एक संगठित आपराधिक गिरोह के सदस्य हैं, जो हत्या, लूट, रंगदारी, अवैध असलहों का उपयोग एवं अन्य जघन्य अपराधों में सक्रिय रूप से लिप्त रहे हैं।

मामले की विवेचना निरीक्षक मोहम्मद अकरम द्वारा की गई थी। अभियोजन पक्ष द्वारा ठोस साक्ष्य और प्रमाण प्रस्तुत करते हुए प्रभावी पैरवी की गई, जिसके फलस्वरूप अपर सत्र विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर कोर्ट बांदा श्री प्रदीप कुमार मिश्रा ने अभियुक्तों को दोषी ठहराया।

विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट अधिवक्ता सौरभ सिंह ने बताया कि यह जनपद का सबसे कुख्यात गैंग था, जिसके लीडर छेदीलाल उर्फ छेदिया हैं, जबकि सोनू, खुशीलाल और रामनरेश,लालजी इसके सक्रिय सदस्य हैं। इन अपराधियों के विरुद्ध विभिन्न थानों में हत्या, लूट और गैंगस्टर एक्ट के कई मुकदमे दर्ज हैं।
उन्होंने कहा —

> “यह फैसला पूरे जनपद के लिए एक संदेश है कि अपराध कितना भी संगठित क्यों न हो, कानून के शिकंजे से कोई नहीं बच सकता। न्यायालय का यह निर्णय न केवल अभियोजन की मेहनत का परिणाम है, बल्कि समाज में न्याय और विश्वास की स्थापना की दिशा में एक मजबूत कदम है।”

 

गैंग चार्ट जिलाधिकारी बांदा द्वारा अनुमोदित कराया गया था, जिसके आधार पर गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत कार्यवाही की गई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा दो गवाह प्रस्तुत किए गए, जिनके साक्ष्यों और दस्तावेजों के गहन परीक्षण के उपरांत न्यायालय ने अभियुक्तों को दोषी पाया और सजा सुनाई।

विशेष लोक अभियोजक अधिवक्ता सौरभ सिंह, पैरोकार राहुल वर्मा, कोर्ट मोहर्रिर जितेन्द्र कुमार और गौरव की कड़ी मेहनत से यह निर्णय संभव हुआ। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि “अपराधियों के लिए समाज में कोई स्थान नहीं है; कानून सबके लिए समान है और न्याय अंततः सत्य की जीत है।”

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