जालौन में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर उठे सवाल, चार दुकानों के चबूतरे तोड़े, आसपास के कथित अवैध निर्माणों पर चुप्पी क्यों?**

राघवेंद्र शर्मा की रिपोर्ट

**दुकानदारों का आरोप नगर पालिका और एसडीएम की कार्रवाई में भेदभाव, शिकायतों के बावजूद अन्य निर्माणों पर नहीं हुई कार्रवाई**

जालौन।जालौन नगर में अतिक्रमण हटाने के नाम पर नगर पालिका की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है दुकानदारों का आरोप है कि नगर पालिका और एसडीएम जालौन की कार्रवाई में निष्पक्षता नहीं बरती गई चार दुकानों के चबूतरे तोड़ दिए गए, जबकि आसपास सड़क और रास्ते की ओर बढ़े हुए अन्य कथित अवैध निर्माण आज भी जस के तस खड़े है

दुकानदारों का कहना है कि उनके चबूतरे अवैध अतिक्रमण की श्रेणी में नहीं थे इसके बावजूद नाली के अंदर बने चबूतरों को जबरन तोड़ दिया गया। उनका सवाल है कि यदि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही थी, तो फिर आसपास के अन्य निर्माणों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई

स्थानीय लोगों के अनुसार एक तरफ सलीम चाय वाले की दुकान के पास नर्सिंग यादव की ओर से सड़क पर सीढ़ियां बनाए जाने का आरोप है वहीं दूसरी ओर महेश चौधरी सीटी कॉम्प्लेक्स के बगल में करीब तीन फुट आगे तक पक्का निर्माण कर दुकान बनाए जाने की बात कही जा रही है दुकानदारों का दावा है कि इन निर्माणों के संबंध में कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई

सवाल यह है कि अतिक्रमण हटाने का नियम सबके लिए एक समान क्यों नहीं यदि निर्माण अवैध हैं तो सभी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। और यदि चार दुकानों के चबूतरे वैध थे तो उन्हें तोड़ने का आधार क्या था

दुकानदारों ने आरोप लगाया कि पत्रकार महेश चौधरी के कहने पर चार दुकानों के चबूतरे तोड़े गए। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नगर पालिका और एसडीएम जालौन का पक्ष भी सामने आना बाकी है

अब जरूरत इस बात की है कि प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए, कार्रवाई का आधार सार्वजनिक करे और जहां भी अतिक्रमण पाया जाए, वहां बिना भेदभाव के कार्रवाई सुनिश्चित करे। वरना अतिक्रमण हटाने के नाम पर चुनिंदा दुकानदारों पर कार्रवाई होने के आरोप प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते रहेंगे

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