*जनपद पंचायत छुईखदान में प्रशासनिक मनमानी का पर्दाफाश 10.24 लाख के फर्जी प्रस्ताव और बिना वर्क ऑर्डर के खेल पर लगी रोक*

 

    शिव शर्मा की रिपोर्ट
छुईखदान / खैरागढ़ ।     छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (KCG) जिले के अंतर्गत आने वाली जनपद पंचायत छुईखदान में प्रशासनिक लापरवाही और मनमाने रवैये का एक बड़ा मामला सामने आया है। बिना किसी ठोस अधिकार और पात्रता के ग्राम पंचायत खैरा नवापारा को कार्य एजेंसी बनाकर प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर 10.24 लाख रुपए का एक संदेहास्पद और गलत प्रस्ताव तैयार कर लिया गया था। हालांकि, समय रहते उठी शिकायतों और ग्राम पंचायत द्वारा कार्य करने से साफ इंकार किए जाने के बाद प्रशासन को आनन-फानन में यह पूरी योजना निरस्त करनी पड़ी।
इस पूरे घटनाक्रम ने जनपद पंचायत के अधिकारियों की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि यदि समय पर आवाज न उठाई जाती, तो एक बड़े वित्तीय घोटाले को अंजाम दिया जा चुका था।
सिलसिलेवार इस प्रकार खुला भ्रष्टाचार का खेल
*17 जुलाई 2026* (प्रस्ताव पारित) जनपद पंचायत छुईखदान के अंतर्गत मरम्मत कार्य के नाम पर 10.24 लाख रुपए की राशि तय करते हुए प्रस्ताव क्रमांक *04* पारित किया गया। *06 जुलाई 2026* (तकनीकी स्वीकृति) ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) द्वारा इस 10.24 लाख रुपए के कार्य के लिए तकनीकी स्वीकृति प्रदान कर दी गई l तृतीय श्रेणी कर्मचारी केश्वरी देवांगन द्वारा जमीनी हकीकत और प्रशासनिक नियमों को ताक पर रखकर उक्त कृत्य को कराया गया l

*23 जुलाई 2026* ( प्रशासकीय स्वीकृति जारी ) जनपद पंचायत छुईखदान ने अपने पत्र क्रमांक 2554 के माध्यम से दोनों कार्यों का प्रशासकीय स्वीकृति जारी किया गया l

*7 से 16 सितंबर 2026*
( कार्यालय भवन में तोड़फोड़ और कार्य प्रारंभ ) बिना वर्क ऑर्डर जारी किए एक तरफ निर्माण सामग्री कार्यालय प्रांगण में एकत्रीकरण प्रारंभ और दूसरी ओर बिना सब इंजीनियर के तकनीकी मार्गदर्शन से छत और छत के बाउंड्रीवाल में तोड़फोड़ शुरूकर छत की ढलाई करा दिया गया l

*18 सितंबर 2026*
( पूरे मामले की लिखित शिकायत ) तृतीय श्रेणी कर्मचारी केश्वरी देवांगन द्वारा नियम विरूद्ध कार्य एजेंसी बनाकर बिना वर्क वार्डर जारी किए, बिना तकनीकी मार्गदर्शन के महत्वपूर्ण शासकीय जप कार्यालय भवन छुईखदान में काम कराने की की लिखित शिकायत जिला प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किया गया l

*21 सितंबर 2026* (जिला पंचायत का जनपद पंचायत छुईखदान को पत्र और इधर ग्राम पंचायत का इंकार)
जिला पंचायत खैरागढ़ ने प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी से शिकायत आवेदन की कॉपी भेजकर मामले में प्रतिवेदन मांगा गया l और इधर जैसे ही मामले की जब ग्राम पंचायत खैरा नवापारा के सरपंच तक पहुंचा, तो उन्होंने लिखित में स्पष्ट कर दिया कि तकनीकी और संसाधनों के अभाव के चलते वे इस कार्य को करने में असमर्थ हैं। पंचायत ने दो टूक शब्दों में कहा कि “हम काम नहीं कर पायेंगे।”
*22 सितंबर 2026* (आनन-फानन में निरस्तीकरण) लगातार बढ़ रहे दबाव और शिकायतों को भांपते हुए तृतीय श्रेणी कर्मचारी जोकि प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पद पर कार्यरत है, केश्वरी देवांगन ने आदेश क्रमांक 3373 जारी कर इस कार्य को तत्काल प्रभाव से ‘निरस्त’ कर दिया। जबकि ऐसा करने का अधिकार एक अराजपत्रित तृतीय श्रेणी कर्मचारी या प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी को नहीं होता है l परंतु स्वेच्छाचारिता के लिए जाने जाने वाली इस अधिकारी के द्वारा कलेक्टर के अधिकार का स्वयं उपयोग करते हुए सामान्य
प्रशासन द्वारा जारी इस प्रकरण में प्रशासकीय और लोक यांत्रिकी विभाग उपसंभाग द्वारा जारी दोनों तकनीकी स्वीकृति को पूरी तरह रद्द कर दिया गया है, जबकि ये भी अधिकार तृतीय श्रेणी कर्मचारी को नहीं होता है l साथ ही आबंटित राशि को वापस 15वें वित्त आयोग में रीस्टोर कर दिया गया है। जबकि केंद्रीय योजना की ये राशि कभी भी रिस्टोर होता ही नहीं है l

*23 सितंबर 2026*
(जनपद छुईखदान से प्रतिवेदन भेजा गया जिला पंचायत खैरागढ़) तृतीय श्रेणी कर्मचारी केश्वरी देवांगन द्वारा एक प्रतिवेदन प्रेषित कर स्वीकार किया गया कि इस कार्य के लिए वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया गया था और शून्य व्यय (0.00 भुगतान) दर्ज किया गया है। आगे अपने प्रतिवेदन में स्वीकार किया कि उपरोक्त कार्य जनप्रतिनिधियों के द्वारा कराया गया है, किंतु जनप्रतिनिधि का नाम, किसकी अनुमति और किस सब इंजीनियर के मार्गदर्शन में कार्य कराया गया है, उसका कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है l

*25 सितंबर 2026*
( जांच दल का गठन)
जिला पंचायत खैरागढ़ कार्यालय ने जनपद पंचायत छुईखदान से प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद अपने आदेश क्रमांक 1681 के माध्यम से दो सदस्यीय जांच दल का गठन कर पूरे मामले का जांच का आदेश जारी किया l
*14 अक्टूबर 2026*
( जांच दल जाएगा कार्य स्थल देखने) जिला पंचायत खैरागढ़ द्वारा गठित जांच दल कार्य स्थल, जनपद पंचायत कार्यालय भवन छुईखदान जाएगा और आवश्यक दस्तावेजों को जांच कर जप्त करने की कार्यवाही कर सकती है l
खैरागढ़ की जनता सवाल कर रही है की इस मामले की यदि शिकायत न होती तो हो जाता बड़ा घोटाला?
वहीं शिकायत के तुरंत बाद एक ही दिन के भीतर इतनी बड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया को रद्द किए जाने से कई गंभीर सवाल खड़े होते है, इस पूरे खेल का मास्टर माइंड कौन?
खैरागढ़ जिले की जनपद पंचायत छुईखदान की इन दिनों भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायतें आम हो चुकी हैं। जिससे सवाल उठता है कि आखिर वह ‘मास्टर माइंड’ कौन है…? जिसके इशारे पर अधिकारी बेखौफ होकर कानून का मखौल उड़ा रहे हैं और शासन-प्रशासन की छवि को धूमिल कर रहे हैं?
जब बिना वर्क ऑर्डर और पंचायत की सहमति के प्रस्ताव आगे बढ़ रहे थे, तो क्या इस पूरे मामले में अंदरखाने किसी वित्तीय लाभ को साधने की साजिश रची जा रही थी?
स्थानीय जानकारों का मानना है कि यदि इस मामले में समय पर लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई जाती और ग्राम पंचायत ने कड़ा रुख न अपनाया होता, तो यह राशि कागजों में ही ठिकाने लगा दी जाती और एक बड़ा घोटाला उजागर होने से पहले ही दब जाता।
यह मामला सिर्फ एक पंचायत का नहीं, बल्कि पूरे जिले की व्यवस्था पर एक बड़ा तमाशा है। अब देखना यह होगा कि क्या उच्चाधिकारी इस मामले में सिर्फ खानापूर्ति कर फाइल बंद कर देंगे या फिर इस खेल के असली गुनहगारों और मास्टरमाइंड तक पहुंचकर कड़ी कार्रवाई करेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *