शिव शर्मा की रिपोर्ट
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के प्रबंध संचालक (MD) महेंद्र सिंह सवन्नी की कार्यप्रणाली को लेकर विभाग के भीतर चल रही चर्चाओं ने अब नया मोड़ ले लिया है। सवन्नी के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को लेकर जहां सवाल उठ रहे हैं, वहीं मंडी बोर्ड कर्मचारी यूनियन ने उनके समर्थन में खुलकर सामने आते हुए पूरे मामले को लेकर गंभीर दावे किए हैं।
*MD की कार्यप्रणाली से किसे परेशानी?*
मंडी बोर्ड से जुड़े सूत्रों का दावा है कि सवन्नी की सख्त और नियम आधारित कार्यशैली से कुछ अधिकारियों में असंतोष है। आरोप यह भी है कि उन्हें पद से हटाने अथवा उनकी छवि प्रभावित करने के लिए एक सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
*बाबू से अपर संचालक तक पहुंचे कमलेश एक्का का नाम*
इस पूरे विवाद में अपर संचालक कमलेश एक्का का नाम भी चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक्का ने सेवा की शुरुआत बाबू के पद से की और पदोन्नति के बाद अपर संचालक के पद तक पहुंचे। उन पर पूर्व में भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाए जाने का भी दावा किया जा रहा है। वहीं, यह आरोप भी सामने आया है कि उनकी नजर मंडी बोर्ड के MD पद पर है। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
*ड्राइवर से वरिष्ठ सचिव तक का सफर*
दूसरा नाम डॉ. मलिक राम पोर्ते का सामने आ रहा है। बताया जाता है कि उनकी सेवा यात्रा ड्राइवर के पद से शुरू हुई और बाद में पदोन्नति के माध्यम से वे वरिष्ठ सचिव मंडी के पद तक पहुंचे। उनके खिलाफ भी पूर्व में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोप लगाए जाने की बात कही जा रही है। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
*यूनियन बोली—सवन्नी जैसे अधिकारी मुश्किल*
मंडी बोर्ड कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष चुन्नीलाल ध्रुव ने सवन्नी के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए उनका समर्थन किया। उनका कहना है कि महेंद्र सिंह सवन्नी ईमानदार, पारदर्शी और नियमों के मुताबिक काम करने वाले अधिकारी हैं। उनके अनुसार, बोर्ड में अनुशासन और नियमों के पालन पर जोर दिए जाने से कुछ लोगों में असंतोष पैदा हुआ है।
*अब सवाल आरोपों की सच्चाई पर*
मंडी बोर्ड में उठे इस विवाद ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वास्तव में MD को हटाने के पीछे पद की महत्वाकांक्षा काम कर रही है या सवन्नी की कार्यप्रणाली को लेकर कोई वास्तविक प्रशासनिक शिकायत है? फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच सच्चाई जांच और संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट हो सकेगी।