शिव शर्मा की रिपोर्ट अभिवादन एक्सप्रेस
*राजपत्र के नियम 8(1) के पालन से लेकर जाति-मूल निवास प्रमाणपत्रों के सत्यापन तक उठे सवाल, पालकों ने हाईकोर्ट से स्वतः संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच की मांग की*
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नीट यूजी काउंसलिंग की प्रक्रिया अब सवालों के घेरे में है। प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश को लेकर सामने आए आंकड़ों ने विद्यार्थियों और पालकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। आरोप है कि काउंसलिंग के चौथे चरण में एमबीबीएस की कुल 87 सीटों में से छत्तीसगढ़ के अभ्यर्थियों को महज 4 सीटें मिलीं, जबकि शेष 83 सीटों पर बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों का चयन हुआ। यदि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह स्थिति सीट आवंटन की प्रक्रिया, पात्रता के निर्धारण और प्रदेश के विद्यार्थियों को मिले अवसरों की समीक्षा की मांग को और गंभीर बनाती है।
*राजपत्र के नियम 8(1) पर विवाद, सीटों के परिवर्तन की प्रक्रिया कठघरे में*
छात्रों और पालकों ने 14 जुलाई 2025 के छत्तीसगढ़ शासन के राजपत्र में उल्लिखित कंडिका 8 का हवाला देते हुए चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (सीजी-डीएमई) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि आरक्षित सीटों के संवर्ग एवं श्रेणी परिवर्तन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और द्वितीय चरण की काउंसलिंग के बाद किए जाने वाले परिवर्तन प्रथम चरण के बाद ही कर दिए गए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सीटों के परिवर्तन और रिक्त सीटों के समायोजन में नियमों का पालन हुआ होता, तो प्रदेश के पात्र मूल निवासी अभ्यर्थियों को अधिक अवसर मिल सकते थे। निजी चिकित्सा महाविद्यालयों की प्रबंधन नियतांश और एनआरआई कोटे की रिक्त सीटों के आवंटन की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में लाने की मांग की जा रही है। हालांकि, नियमों के कथित उल्लंघन की पुष्टि के लिए राजपत्र, काउंसलिंग की समय-सारणी और सीट आवंटन के आधिकारिक अभिलेखों का परीक्षण आवश्यक है।
*1,100 नए आरक्षित अभ्यर्थियों की संख्या पर सवाल*
काउंसलिंग के आंकड़ों को लेकर एक अन्य गंभीर आपत्ति भी सामने आई है। पालकों का दावा है कि पहले चरण में अनुसूचित जाति वर्ग के लगभग 350 और अनुसूचित जनजाति वर्ग के करीब 750 नए अभ्यर्थी सूची में जुड़े। इसके अलावा लगभग एक हजार स्थानीय निवासियों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि होने का भी दावा किया गया है।
इन आंकड़ों के आधार पर अभ्यर्थियों की पात्रता, जाति प्रमाणपत्रों और मूल निवास प्रमाणपत्रों के सत्यापन की मांग उठाई गई है। कुछ बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों द्वारा कथित रूप से फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए राज्य कोटे का लाभ लेने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए संबंधित प्रमाणपत्रों और अभिलेखों की निष्पक्ष जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।
*छात्रों के भविष्य का सवाल, हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की अपील*
विद्यार्थियों और पालकों का कहना है कि चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और निर्धारित नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने काउंसलिंग के प्रत्येक चरण में सीटों की उपलब्धता, संवर्ग परिवर्तन, अभ्यर्थियों की पात्रता और अंतिम आवंटन की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच और अनियमितता प्रमाणित होने पर कार्रवाई की मांग भी की गई है। पालकों ने चेतावनी दी है कि मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। साथ ही, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतः संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच के निर्देश देने की अपील की गई है।
अब निगाहें शासन और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के आधिकारिक स्पष्टीकरण पर हैं। सवाल केवल 87 सीटों में से 4 सीटें मिलने का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि प्रदेश के पात्र विद्यार्थियों को उनका वैधानिक अवसर मिला या नहीं। सीट आवंटन के आंकड़ों और राजपत्र के प्रावधानों की निष्पक्ष जांच ही इस विवाद की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकती है।