शिव शर्मा की रिपोर्ट
*खैरागढ़/छुईखदान* खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की जनपद पंचायत छुईखदान में प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पद पर एक अराजपत्रित तृतीय श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति और अधिकारों को लेकर गंभीर प्रशासनिक विवाद सामने आया है। निर्वाचित सभापति एवं जनपद सदस्यों ने एक अराजपत्रित तृतीय श्रेणी कर्मचारी को जनपद पंचायत का संपूर्ण प्रभार सौंपे जाने पर सवाल उठाते हुए कलेक्टर सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है l दो-तिहाई से अधिक निर्वाचित जनपद सदस्य संबंधित प्रभारी सीईओ को हटाने के पक्ष में हैं।
मामले में 23 अक्टूबर 2026 को होने वाली सामान्य प्रशासन समिति एवं सामान्य सभा की बैठकों से पहले प्रश्नाधीन मामले में स्पष्ट लिखित निर्णय मांगा गया है।
*तृतीय श्रेणी कर्मचारी को संपूर्ण प्रभार सौंपने पर गंभीर सवाल*
आवेदन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के आदेश क्रमांक *ESTB/4459/2025-P&R D* का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि जिला पंचायत खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रेम कुमार पटेल ने श्रीमती केश्वरी देवांगन को जनपद पंचायत छुईखदान का संपूर्ण प्रभार सौंपा है। आवेदनकर्ताओं के अनुसार, संबंधित कर्मचारी अराजपत्रित तृतीय श्रेणी संवर्ग से हैं और प्रभार आदेश पर कलेक्टर का अनुमोदन अंकित है l
निर्वाचित जनपद सदस्यों का कहना है कि इस मामले में निर्णय लंबित रहने से प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसलिए कलेक्टर को तत्काल हस्तक्षेप कर वैधानिक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
*निर्णय में देरी हुई तो वित्तीय प्रभार सक्षम अधिकारी को सौंपने की मांग*
आवेदन के सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में संबंधित वित्तीय प्रभार का मामला शामिल है। निर्वाचित सदस्यों ने वित्त विभाग के पत्र क्रमांक *387/वित्त/नियम/चार/2025, दिनांक 21 जुलाई 2025* का हवाला देते हुए कार्यालय प्रमुख तथा आहरण एवं संवितरण अधिकारी से संबंधित प्राधिकरण की जांच की मांग की है।
आवेदनकर्ताओं के अनुसार, इस विषय में 27 मार्च 2026 और 8 अप्रैल 2026 को जिला प्रशासन एवं जिला पंचायत कार्यालय को लिखित जानकारी दी गई थी। इसके बाद 17 सितंबर 2026 को आधे से अधिक निर्वाचित सभापति एवं जनपद सदस्यों ने भी कार्रवाई के लिए आवेदन प्रस्तुत किया, लेकिन उनके दावे के अनुसार अब तक अपेक्षित निर्णय जानबूझकर किसी दबाव में नहीं लिया गया है।
सदस्यों ने स्पष्ट मांग की है कि यदि प्रभार आदेश की वैधानिकता और अधिकारों के संबंध में अंतिम निर्णय लेने में समय लगता है, तो *निर्णय लंबित रहने की अवधि में संबंधित वित्तीय प्रभार तत्काल किसी सक्षम अधिकारी को सौंपने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।* सदस्यों ने चेतावनी देते हुए कहा कि वित्तीय अधिकारों का प्रयोग केवल नियमानुसार अधिकृत अधिकारी द्वारा ही सुनिश्चित होना चाहिए।
*सामान्य प्रशासन समिति के सचिवीय अधिकारों पर भी विवाद*
आवेदन में छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 47 तथा छत्तीसगढ़ जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत स्थायी समितियां नियम, 1994 के नियम 25(1) का उल्लेख किया गया है।
निर्वाचित सदस्यों ने कलेक्टर से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि वर्तमान प्रभारी अधिकारी , जोकि एक अराजपत्रित तृतीय श्रेणी कर्मचारी है, को सामान्य प्रशासन समिति के सचिव के दायित्वों का निर्वहन करने के लिए विधिवत अधिकृत हैं या नहीं। उनका आग्रह है कि 23 अक्टूबर की बैठक से पहले इस संबंध में लिखित एवं कारणयुक्त निर्णय दिया जाए, ताकि समिति की कार्यवाही को लेकर किसी प्रकार की वैधानिक अनिश्चितता न रहे।
*आपराधिक प्रकरण में फँसाए जाने की आशंका, वीडियोग्राफी की मांग*
इस विवाद का एक संवेदनशील पहलू आगामी बैठकों की निष्पक्षता और निर्वाचित सदस्यों की सुरक्षा से जुड़ा है। आवेदन में पूर्व में जनपद पंचायत में पदस्थ एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी द्वारा एक जनपद सदस्य के विरुद्ध दर्ज कराए गए आपराधिक प्रकरण का उल्लेख किया गया है। आवेदनकर्ताओं के अनुसार, मामला न्यायालय में विचाराधीन है और संबंधित जनपद सदस्य को सर्वोच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत तथा बाद में संबंधित ट्रायल कोर्ट से नियमित जमानत मिली है।
आवेदनकर्ता इस प्रकरण का उल्लेख केवल पृष्ठभूमि के रूप में करते हुए कहते हैं कि आगामी बैठकों में किसी कथन, घटना अथवा कार्यवाही को लेकर विवाद उत्पन्न होने और उसके आधार पर आपराधिक शिकायत किए जाने की आशंका को देखते हुए पूरी प्रक्रिया का निष्पक्ष रिकॉर्ड होना जरूरी है।
इसी कारण 23 अक्टूबर 2026 को होने वाली सामान्य प्रशासन समिति और सामान्य सभा की दोनों बैठकों की शुरुआत से समापन तक निरंतर वीडियोग्राफी कराने की मांग की गई है। साथ ही, जिला प्रशासन के किसी सक्षम राजपत्रित अधिकारी को पर्यवेक्षक नियुक्त करने और वीडियो रिकॉर्डिंग तथा बैठक की कार्यवाही के अभिलेख सुरक्षित रखने का आग्रह किया गया है।
सदस्यों का कहना है कि इससे भविष्य में किसी आरोप या विवाद की स्थिति में वास्तविक घटनाक्रम का सत्यापन किया जा सकेगा और किसी निर्दोष निर्वाचित सदस्य को निराधार आरोपों के कारण अनावश्यक कानूनी परेशानी का सामना करने से बचाने में मदद मिलेगी। यह मांग किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि बैठक की पारदर्शिता और सभी सदस्यों के हितों की सुरक्षा के उद्देश्य से की गई है।
*स्थायी समिति की बैठकों में नस्तियों के अवलोकन का मामला*
आवेदन में संचार एवं संकर्म स्थायी समिति की 8 सितंबर 2026 और 8 अक्टूबर 2026 की बैठकों का भी उल्लेख है। आवेदनकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इन बैठकों में नस्तियों के अवलोकन कराने से इनकार किया गया था।
उनके अनुसार, 6 अक्टूबर 2026 के पत्र क्रमांक 37 के कथित उल्लंघन के संबंध में कार्रवाई की मांग करते हुए समिति के सचिव ने 9 अक्टूबर 2026 को बैठक के कार्यवाही विवरण सहित जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रेम कुमार पटेल को पत्र भेजा था। सदस्यों का आरोप है कि इस मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने संबंधित पत्रों, कार्यवाही विवरण और उपलब्ध अभिलेखों की जांच कर नियमानुसार निर्णय लेने की मांग की है। ज्ञात हो कि उक्त मांग में समिति के सदस्यों को फाइल अवलोकन करवाने से मना करने वाली तृतीय श्रेणी कर्मचारी प्रभारी CEO केश्वरी देवांगन को निलंबित करने का भी प्रस्ताव जनपद से पारित हो चुका है l
*तृतीय श्रेणी कर्मचारी प्रभारी सीईओ की मनमानी की लंबी सूची*
जनपद पंचायत की सामान्य सभा में पारित जांच दल के गठन और ग्राम पंचायत पेंडरवानी सहित अन्य जांच कार्यों में कथित बाधा, कुछ ग्राम पंचायतों में जांच लंबित रहने तथा 15वें वित्त आयोग की राशि और स्वीकृत कार्यों के क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए हैं। 15वे वित्त योजना कि राशि रिस्टोर करने का प्रावधान नहीं होने के बावजूद स्वीकृत कार्य को निरस्त कर राशि रिस्टोर करने की मनमानी किया गया है l
इसके अतिरिक्त, सामान्य प्रशासन समिति के निर्णय को रद्द करने का अधिकार कलेक्टर या राज्य सरकार को होता है l राज्य सरकार और कलेक्टर के अधिकार का प्रयोग बिना अनुमति प्रभारी CEO इस तृतीय श्रेणी कर्मचारी द्वारा स्वयं करते हुए जनपद अध्यक्ष और सभापतियों के निर्णय को एकतरफा निरस्त कर दिया गया है l जनमन योजना के अधूरे आंगनबाड़ी भवन के पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने की मनमानी, कार्यालय के लिए चेयर सहित अन्य सामग्री की खरीदारी, अन्य विभाग RES की तकनीकी स्वीकृतियों को निरस्त करने की मनमानी, 25 साल पुराने जनपद पंचायत कार्यालय भवन में बिना अनुमति मनमानी पूर्वक तोड़फोड़ करवाने का कार्य, बिना प्राक्कलन, बिना तकनीकी मार्गदर्शन से भवन की छत पर निर्माण कार्य, ग्राम पंचायत सचिवों के अपने स्तर पर वेतन रोकने, खास कर अनुसूचित जनजाति वर्ग के सचिवों का वेतन रोकने का मनमानी, गार्बेज रिक्शा खरीदी के सत्यापन नियम विपरित संविदा कर्मी से करवाकर लाखों की वित्तीय गड़बड़ी करवाने की मनमानी तथा जेम पोर्टल से संबंधित मामलों में भी कलेक्टर की आपत्ति को दरकिनार कर ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव से Gem पोर्टल से खरीदी में गलत प्रक्रिया करवाने का विषय सहित सभी मामलों की अभिलेखों के आधार पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई करने का आग्रह किया है l
*कलेक्टर और पंचायत विभाग से समयबद्ध निर्णय की मांग*
निर्वाचित सभापति एवं जनपद सदस्यों ने कलेक्टर को सौंपे आवेदन की प्रतिलिपि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, संचालक पंचायत, नवा रायपुर तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रेम कुमार पटेल को भी भेजी है।
जनपद पंचायत छुईखदान के दो तिहाई से अधिक निर्वाचित सदस्यों ने मांग की है कि प्रभार आदेश की वैधानिकता, वित्तीय अधिकारों, सामान्य प्रशासन समिति के सचिवीय प्राधिकरण और अन्य शिकायतों पर 23 अक्टूबर की बैठकों से पहले लिखित एवं कारणयुक्त निर्णय दिया जाए। यदि किसी बिंदु पर अंतिम निर्णय संभव न हो, तो अब तक की गई कार्रवाई, शेष जांच और निर्णय की संभावित समय-सीमा की जानकारी लिखित रूप में दी जाए।
आवेदन के साथ शासनादेश एवं संपूर्ण प्रभार आदेश, वित्त विभाग के 21 जुलाई 2025 के पत्र, 6 अक्टूबर 2026 के पत्र, स्थायी समिति की बैठकों से संबंधित उपलब्ध अभिलेख, 9 अक्टूबर 2026 को भेजे गए पत्र तथा प्रभारी अधिकारी के 22 और 23 सितंबर 2026 के पत्रों की प्रतियां संलग्न किए जाने का उल्लेख है।
*अब निगाहें जिला प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं।* 23 अक्टूबर की बैठकों से पहले प्रभार आदेश की वैधानिकता और वित्तीय अधिकारों पर क्या निर्णय लिया जाता है, तथा पर्यवेक्षक नियुक्ति और वीडियोग्राफी की मांग पर क्या कार्रवाई होती है, यह आगामी दिनों में स्पष्ट होगा।