ब्रजेश उदैनियाँ की रिपोर्ट
जालौन। नगर के गोविंदेश्वर मंदिर स्थित रामलीला भवन में चल रहे ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव-2026 के पांचवें दिन धनुष यज्ञ की लीला का भव्य एवं भावपूर्ण मंचन किया गया। भगवान राम द्वारा धनुष भंजन, सीता स्वयंवर तथा परशुराम-लक्ष्मण के ओजपूर्ण संवाद ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। वहीं दूल्हे राजा के हास्य अभिनय ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया।
लीला के प्रथम दृश्य में गुरु विश्वामित्र राजा जनक के यहां राम और लक्ष्मण को लेकर सीता स्वयंवर में पहुंचते हैं। स्वयंवर में देश-देशांतर के अनेक राजा भी भाग लेने आते हैं। इसी दौरान रावण और बाणासुर का आगमन होता है। दोनों के बीच हुए जोरदार संवाद को सुनकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। रावण के रूप में प्रहलाद यादव कोटरा एवं बाणासुर की भूमिका निभा रहे पं प्रयाग नारायण दुबे गुरु के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा।
दूसरे दृश्य में दूल्हे राजा की बारात विशेष आकर्षण का केंद्र रही। दूल्हे राजा की भूमिका में पंचम दीवाना ने अपने हास्य अभिनय और कविताओं से रामलीला प्रांगण में बैठे दर्शकों को खूब हंसाया।
शुभ मुहूर्त में स्वयंवर में आए राजा एक-एक कर भगवान शिव का धनुष उठाने का प्रयास करते हैं, लेकिन कोई भी उसे हिला तक नहीं पाता। इससे व्यथित राजा जनक विलाप करते हुए वीरविहीन धरती होने की बात कहते हैं। राजा जनक के वचन सुनकर लक्ष्मण क्रोधित हो उठते हैं। इसके बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान राम धनुष उठाते हैं और उसका भंजन कर देते हैं। धनुष टूटते ही पूरा रामलीला भवन जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। माता सीता ने भगवान राम के गले में जयमाला डालकर उनका वरण किया।
धनुष टूटने की गर्जना सुनकर भगवान परशुराम सभा में पहुंचते हैं। इसके बाद परशुराम और लक्ष्मण के बीच हुए तीखे एवं ओजपूर्ण संवाद ने दर्शकों में रोमांच भर दिया। परशुराम की भूमिका में कानपुर से आए कपिल तिवारी तथा लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले बुंदेलखंड के महान कलाकार सीपू पारासर के संवाद को दर्शकों ने खूब सराहा। यह संवाद देर रात तक चला।
रामलीला में विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाने वाले कलाकारों ने अपने सजीव अभिनय से लीला को प्रभावशाली बनाया। धनुष भंजन और सीता स्वयंवर के भावपूर्ण दृश्यों के साथ हास्य एवं ओजपूर्ण संवादों ने पांचवें दिन की लीला को यादगार बना दिया। राम की सुंदर उनका मनोज तिवारी काजू महाराज, लक्ष्मण शिपु पाराशर,सीता राम दूत तिवारी, जनक रमेश दुबे, परशुराम कपिल तिवारी कानपुर, रावण पहलाद यादव कोटरा, बाणासुर प्रयाग दुबे उरगांव तथा सुनैना का सुंदर अभिनय भगवानदास इंदरगढ़ ने किया।